Fog and Sun Have Fun Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps December 28, 2025 Fog flies, quivering...Offspring of a roaring ocean-Tease sun in salty games.@✍️Rajneesh Kumar Mishra(Copyright Reserved) Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं! October 23, 2025 मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । ताज़-ए-सर-जमीं का सितारा हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं ।। मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं। मुझे नासमझss -२ तू ना समझss । मैं फलक से वतन पे उतारा हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। मेरे खून-ए-ज़िगर-२ तू मरहम है । मैं मां के पैरों का महावर हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। दूद-ए-मादर का असर-२ मेरा फ़र्ज़ है । ईश्क-ए-रूहानी-बाग का, मैं कुंवारा हुआ हूं ।। मैं दार-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। मेरे बूढ़े बाबा-२ तू अनाज है । मैं तेरे पसीने से संवारा हुआ हूं ।। मैं दार-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं। हक़्क़-ए-नक़्ल महफ़ूज़...! ✍️© रजनीश कुमार मिश्र Read more
बिहार, बिहारी और छठ : छठी मईया के श्री चरणों में सादर समर्पित एक ग़ज़ल ! October 27, 2025 हम बिहार-ए-बाशिंदा एक ख़ास तेहवार करते हैं । जान वो जिगर से सूरज का इबादत वो प्यार करते हैं । ढलते हुए सिराज पर दिल वो जां निसार करते हैं । फर्ज़ के आबे दरिया में छठी मईया का दीदार करते हैं । मत पूछ मेरी जां, कि बिहारी कैसा व्यवहार करते हैं । पूरी कायनात के लिए, रिफ़ाह-ए-आम का एहतराम करते हैं । सारे मजहबों के मालिक, शिरकत करें हम आह्वान करते हैं । कुदरती सौग़ात हैं, हम इंसा हैं, इंसा से प्यार करते हैं। गन्ना, मौसमी फल, लज़ीज़-ए-ख़ास खस्ता चढ़ाया करते हैं । रहें देश या परदेश, अम्मा के लाल आंचल में समाया करते हैं । ।। जय छठी मईया ।। छठ महापर्व पर जगत जननी के प्रति अपार श्रद्धा व अटूट विश्वास के साथ...! आपका ✍️©रजनीश कुमार मिश्र (हक़्क़-ए-नक़्ल महफ़ूज़) Read more
'He' and 'She' : The Root Forms of Lives October 20, 2025 Root of 'me' in the 'she' form, Argued with me, the root 'he' form ; Over 'his' logical behaviour, As 'he' form has his wit heavier. As a root 'she' form forms human-forms So she's tender without worldly norms. My this case too isn't unique ; 'She's' the tenderest, now old and weak. I feel 'her' in my humble heart's fabrics, And 'him' in the clever brain's tactics. My heart can't anymore hold her tears As it's overfilled in thirty-six long years. O, Holy Nature ! Your brain's the hard 'Quarters', To protect the nourishing heart's holy 'Waters' ! ✍️ ©Rajneesh Kumar Mishra (Copyright Reserved ) Read more
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