WARNING TO CHINA Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 19, 2020 CHINA, YOUR BETRAYAL WILL NOT BE FORGOTTEN!Your product stores will be rotten.For wiping your wounds there will be lack of cotton.One day, you will vomit the wealth ill-gotten. by Rajneesh Kumar Mishra Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं! October 23, 2025 मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । ताज़-ए-सर-जमीं का सितारा हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं ।। मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं। मुझे नासमझss -२ तू ना समझss । मैं फलक से वतन पे उतारा हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। मेरे खून-ए-ज़िगर-२ तू मरहम है । मैं मां के पैरों का महावर हुआ हूं ।। मैं दौर-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। दूद-ए-मादर का असर-२ मेरा फ़र्ज़ है । ईश्क-ए-रूहानी-बाग का, मैं कुंवारा हुआ हूं ।। मैं दार-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं।। मेरे बूढ़े बाबा-२ तू अनाज है । मैं तेरे पसीने से संवारा हुआ हूं ।। मैं दार-ए-दर्द का इक सहारा हुआ हूं । मैं सिपाही हूं, आशिक-आवारा हुआ हूं। हक़्क़-ए-नक़्ल महफ़ूज़...! ✍️© रजनीश कुमार मिश्र Read more
बिहार, बिहारी और छठ : छठी मईया के श्री चरणों में सादर समर्पित एक ग़ज़ल ! October 27, 2025 हम बिहार-ए-बाशिंदा एक ख़ास तेहवार करते हैं । जान वो जिगर से सूरज का इबादत वो प्यार करते हैं । ढलते हुए सिराज पर दिल वो जां निसार करते हैं । फर्ज़ के आबे दरिया में छठी मईया का दीदार करते हैं । मत पूछ मेरी जां, कि बिहारी कैसा व्यवहार करते हैं । पूरी कायनात के लिए, रिफ़ाह-ए-आम का एहतराम करते हैं । सारे मजहबों के मालिक, शिरकत करें हम आह्वान करते हैं । कुदरती सौग़ात हैं, हम इंसा हैं, इंसा से प्यार करते हैं। गन्ना, मौसमी फल, लज़ीज़-ए-ख़ास खस्ता चढ़ाया करते हैं । रहें देश या परदेश, अम्मा के लाल आंचल में समाया करते हैं । ।। जय छठी मईया ।। छठ महापर्व पर जगत जननी के प्रति अपार श्रद्धा व अटूट विश्वास के साथ...! आपका ✍️©रजनीश कुमार मिश्र (हक़्क़-ए-नक़्ल महफ़ूज़) Read more
'He' and 'She' : The Root Forms of Lives October 20, 2025 Root of 'me' in the 'she' form, Argued with me, the root 'he' form ; Over 'his' logical behaviour, As 'he' form has his wit heavier. As a root 'she' form forms human-forms So she's tender without worldly norms. My this case too isn't unique ; 'She's' the tenderest, now old and weak. I feel 'her' in my humble heart's fabrics, And 'him' in the clever brain's tactics. My heart can't anymore hold her tears As it's overfilled in thirty-six long years. O, Holy Nature ! Your brain's the hard 'Quarters', To protect the nourishing heart's holy 'Waters' ! ✍️ ©Rajneesh Kumar Mishra (Copyright Reserved ) Read more
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