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ईद की बधाईयां

ईद की ढेर सारी बधाईयां हमारे प्यारे, जिगर छल्लों, क़मर, नज़र, ज़ियाउल और अकबर भईया ! ना भूल जाना हमें आज चूंकि हमें भी ख़ूब पसंद हैं सुस्वादु, लजीज़-ए-शाह, सेंवइयां । हाय, क्या आफत है पेट में, पचता नहीं दूध, मलाई, मीट, मछली और पुआ ! छोड़ो मेरे जीभ की बात, मेरी सेहत वो दुनिया के लिए भी कर देना ऊपर वाले से दुआ। के सुना है मैने कहीं से कि दुआओं में बहुत ही असर होता है...। अज़ीज़-ए-जमात भी बहुत है मेरे, पर ख़ुदा जाने कि क्यों आजकल ग़म में ही बसर होता है। लव यू ऑल...! हैप्पी ईद टू यू ऑल! @ रजनीश कुमार मिश्र 

रग रग में रंग बसा है... शुभ होली 2025

A।। कारी कारी केशिया गोरी- २ हायss, तोरी श्याम रंग होरी मुझ पर- २ तोरी गोरी गोरी गालों की,  हायss, गेहुआं, रंग होरी मुझ पर- २ अंखियों के लाज लालिमा की- २ हायss, तोरी लाल लाल होरी मुझ पर- २ मधुमास सी अधर सुधा की- २ हायss, गुलाबी रंग होरी मुझ पर ।। कारी कारी केशिया गोरी तोरी श्याम रंग होरी मुझ पर....२ B।। कँचन कानों की कुंडल की- २ हायss, तोरी स्वर्ण रंग होरी मुझ पर- २ नीले नीले गले हार की- २ हायss, तोरी नीली रंग होरी मुझ पर- २ व्याकुल कर दे जो बाजूबंद- २, हायss, उनकीss रौनक, रंग होरी मुझ पर- २ कोमल कटि नशीली नागन सी-२ हायss, चढ़ी नशा रंग होरी मुझ पर- २ ।। कारी कारी केशिया गोरी तोरी श्याम रंग होरी मुझ पर....२ C।। हाथों में मोहक मेंहदी तोरी- २ हायss, चटक मेंहदी रंग होरी मुझ पर- २ तोरी पांवों की पायल की- २ हायss, चढ़ी रजत रंग होरी मुझ पर- २ इस चांद सी दुल्हनियां की- २ हायss, मांग भरी सुहागिन की सिंदूरी रंग होरी मुझ पर- २ तेरे तन-मन यौवन निर्झर की- २ हायss, है झर झर होरी मुझ पर- २।। कारी कारी केशिया गोरी तोरी श्याम रंग होरी मुझ पर....२ D।। हर नर नारी में हर्षा हो- २ हायss, राम रसायन वर्ष...

A Billionaire Bus Porter

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The typical appeal and urge of the bus porter Calling and reminding of stops big and small   In a voice - loud, irritating, cracking reporter  He's lin body, skinny, double bent but was tall  He's worn-torn dress- T-shirt, holed half pant A dirty ripped angocha wrapp'd around his neck. Commanding all road-mates for safety-hunt He's hung like the Albatross at the gate-check Not kill'd but left surviving for his role Who hid him from Him and His blessings? Gray haired seems going to graveyard, the goal Humanity should go for his wound dressings! With sunken eyes, hollow cheeks, a poor soul,  Look'd suck'd but still brisk in getting on and off. His heart is holy as he's out of holding the whole  He celebrates his trips as if he earns more than enough. Shocking my eyes he shared his coins to a beggar  Where many of us, the earners gave ignorance  Some seem'd silent to her cry like that of an egger  The power of the porter lies in his ...

एक नज़्म: आख़िर क्यों?

आख़िर क्यों इतना तड़पती है, दौलत वो दुनियावी नजात के लिए? अगरचे तू भी सुपुर्द-ए-खाँक होगी अकेली मातमी ज़मात के लिए । मोहब्बत का मरहम लाफ़ानी करता है, गर बांट दो हर मज़हब हर जात के लिए । किसी का इन्तकाल हुआ है वहां, बातें हो रही हैं उसके हरेक बात के लिए । तेरी नाज़ वो नखरें, नैन वो नक्श ख़ुदा ने ख़ास बनाया मेरे लिए। मेरे इश्क की आजमाइश तु कर लेकिन बस सुकून के लिए। मैं फ़क़ीर हुं, रूपया वो रकम नहीं है, दिल है और बाहें है आग़ोश के लिए । मैं टूटा हुआ सितारा हुं, चमक उठूंगा, बस एक बार जोड़ दें, ख़ुदा के लिए । मेरी जां, तू वाक़िफ है उसूल-ए-दुनिया से, कब्ज़ के नुस्खे में केले का पेड़ कट जाता है। कसाई को बकरे की हलाली में बोलो कब तरस आता है? यूं तो हसीं है लाखों इस दुनिया में, पर हर कोई दिल को रास कहां आता है? मोहब्बत-ए-फ़क़ीर को ख़बर है कि हर पैदाइश में मोहब्बत नसीब नहीं हो पाता है। हुस्न-ए-नूर, तुझे मेरे दर्द-ए-दिल का एहसास क्या होगा? मरीज़-ए-इश्क जिएं या मर जाएं पत्थर-ए-दिल को फ़र्क क्या होगा? दरिया के बाहर तड़पते मछली की दीदार से, मछुआरे को क्या होगा? फव्वारे से भरा गुब्बारे का इंसा, बोल तु...

मतदाता जागरण गीत

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चल चलीं सभेँ, तs चल चलीं सभेँ, हतs चल चलीं सभेँ  मतदान केंदरवा पर, हजी मतदान केंदरवा पर... बूथवा पs जाके भोटावा गिरायीं-२ विकास के गंगा में डुबकी लगाईं -२ बचालीं जी देशवा कपटी छलिया सेs... तs चल चलीं सभेँ, हतs चल चलीं सभेँ, मतदान केंदरवा पर... आईगइल बा चुनावs के समईया- २  सोच समझs के भोट दिहs हो भैया- २ छालs ओढ़लेबा बाघवा दुधारू गईया केs... तs चल चलीं सभेँ, तs चल चलीं सभेँ, हतs चल चलीं सभेँ  मतदान केंदरवा पर, हजी मतदान केंदरवा पर... अगर, देशवा ह नाव त रउरे खेवैय्या- २ नेता ना बेटा मांगेली भारत मैय्या-२ भोटवा के चोटावा से मारीं चईया केs... तs चल चलीं सभेँ, तs चल चलीं सभेँ, हतs चल चलीं सभेँ  मतदान केंदरवा पर, हजी मतदान केंदरवा पर... मास- मछरी, अण्डा पर भोट जे गिराई - २ गिद्ध बनी राजा देश नोच नोच खाई- २ मत के क़ीमत तू पुछिहs अंतर मनवा से... तs चल चलीं सभेँ, तs चल चलीं सभेँ, हतs चल चलीं सभेँ  मतदान केंदरवा पर, हजी मतदान केंदरवा पर... गांव आ नगर तरक्की यदि चाहीँ- २ लालच में भईया पड़ीहs तू नाहीं- २ राम राज आई रावण मारलाs से... तs चल चलीं सभेँ, तs चल चलीं स...

प्रभु श्रीराम से दिल लगाओ ना(एक भजन)

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अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, हेss अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, नयनों में राम रस नीर भरलोss, राम नाम भजलो ना, राम भजलो, सिया राम भजलो ना, राम भजलो । १.अश्रु बहालो, नयन-दीप बनालो, पलकों को मोड़ मोड़ बाती बनालो, मन मन्दिर को जग मग करलोs, राम भजलो ना, राम भजलो, सिया राम भजलो ना, राम भजलो.... अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, हेss अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, नयनों में राम रस नीर भरलोss, राम भजलो ना, राम भजलो, सिया राम भजलो ना, राम भजलो । २. जिह्वा जीवंत करलो, स्वर थोड़ा मंद करलो चक्षुओं को आधा खोलो, आधा आधा बंद करलो अधरो पे सिया राम शयन करलोs, राम भजलो  ना, राम भजलो, सिया राम भजलो ना, राम भजलो.... अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, हेss अवध में आओ ना, पलकें बिछाओ ना, रोम रोम रमाओ ना, नयनों में राम रस नीर भरलोss, राम भजलो ना, राम भजलो, सिया राम भजलो ना, राम भजलो । ३. मुख से राम नाम बोलो, कानों में मिश्री घोलो     सांसों की माला से, राम नाम जाप करलो । नश्वर काया को अवध धाम करलोs, राम...

A Cipher in Brain

Thou art the basis of thy existence In the form of a human in real sense. Some men turn'd painfully into women  Who blam'd Him not their own brain. Thou hast to represent thyself  Whether the fake or the real-self. Thou art really very kind and caring But thy idea maketh thee daring. Thee wants to create thy creator And then a heaven after elevator. O thee, the puppet of His hands, Creator is He of sun, moon and sands. Thy aims each minute, art multiplying. Thou stuffs wishes and more supplying. Thy breathing system is momentry  But thee opt for His symmetry. Why art thou so perplex'd ? Creations of His art so relax'd. Why to die at the hands of mind games. Open thy heart with His names. @ Rajneesh Kumar Mishra